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चूहा और बड़ा चूहा के खेल में लूट गए हज़ारों लोग

चूहा और बड़ा चूहा के खेल में लूट गए हज़ारों लोग.

चूहा बना मास्टर, की तो बड़ा चूहा बना मोहरा.

ठगी करनेवालों ने “चूहा” और ” बड़ा चूहा” नाम से बनाया था कोडवर्ड

8 स्किमर मशीन के साथ 150 से ज्यादा क्लोनिंग एटीएम बरामद 8 गिरफ्तार

मुंबई – संवाददाता

मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई अन्य इलाकों में स्किमर के जरिए क्रेडिट व डेबिट कार्ड की क्लोनिंग करके ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करने वाली मुम्बई क्राइम ब्रांच को केस में बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने इस सिंडीकेट के मास्टरमाइंड मोहम्मद फैज को गिरफ्तार कर लिया है। फैज के साथ सिंडिकेट से जुड़े 3 और लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब तक कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है…

मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 9 की जांच में बेहद ही चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक ठगी के इस सिंडिकेट से जुड़े सभी आरोपी लोगों को ठगने के लिए कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करते थे। इस ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले स्किमर यानी जिसके जरिये ग्राहक के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का डाटा कॉपी होता था, उसे आरोपियों ने ‘चूहा’कोडवर्ड दिया था, जबकिं मैग्नेटिक कार्ड रीडर, जिससे मैग्नेटिक कार्ड को बनाने में इस्तेमाल किया जाता था, उसे ‘बड़ा चूहा’ कोडवर्ड का नाम दिया था।

इतना ही नही, जिन जगहों से इस ठगी को अंजाम दिया जाता था, उसके तीन स्पॉट की भी क्राइम ब्रांच ने पहचान कर ली है, जिसमें से 2 मुम्बई के और 1 पुणे का है। चूहा और बड़ा चूहा के जरिए इस गिरोह ने अब तक करीब 1000 लोगों से ठगी कर चुका है और इनके पास से करीब 149 क्रेडिट कार्ड और 22 डेबिट कार्ड बरामद किए जा चुके हैं। अहम जानकारी ये भी सामने आई है

इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड फैज सिर्फ 10वीं तक पढ़ा है और 2019 से इस सिंडिकेट के जरिए ठगी को अंजाम दे रहा था। जानकारी के मुताबिक 2018 में वह इसी तरह की ठगी करने वाले एक गैंग के साथ काम करता था, लेकिन इसको सीख लेने के बाद उसने खुद की गैंग बना ली। इस मामले में गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में कोई भी 12वी से ज्यादा पढ़ा नही है। फैज ने इसमें से 3 आरोपियों को ग्राहकों के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का डाटा कॉपी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी,जिसकी एवज में उन्हें हर कार्ड पर 500 रुपये मिलता था, जबकिं 3 को सतारा, पुणे और सांगली के एटीएम से पैसे निकालने की जिम्मेदारी, जिन्हें कुल रकम का 10 फीसदी फैज देता था, जबकिं एक आरोपी होटल या अन्य दुकानों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारियों को खोजने का जिम्मा सौंपा गया था जो लालच में आ जाएं।

अकबर पठान (डीसीपी क्राइम ब्रांच मुंबई) ने बताया कि मोड्स ओपेरंडी के तहत होटल में या अन्य शॉप में काम करने वाला शख्स डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए खरीददारी करने वाले ग्राहकों के कार्ड का डाटा स्किमर के जरिए कॉपी कर लेता था। इतना ही नही, वह चोरी छिपे ग्राहकों के कार्ड का पिन भी नोट कर लेता था। इसके बाद इस डाटा को लैपटॉप में कॉपी करने फैज मैग्नेटिक कार्ड रीडर के जरिये कार्ड का क्लोन तैयार करता था और फिर उसमें चुराए गायब पिन को डालकर ग्राहकों के खाते से पैसे उड़ा दिए जाते थे और उन्हें इसकी जानकारी तक नही होती थी। क्राइम ब्रांच के मुताबिक इस सिंडिकेट में 1-2 लोगो के और शामिल होने के सुराग मिले हैं।

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