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पापा दूसरे घर में क्यों रहते हैं -पापा घर क्यों नही आते हैं ।

पापा दूसरे घर में क्यों रहते हैं -पापा घर क्यों नही आते हैं ।

महाराष्ट्र के बीड जिले की एक ऐसी कहानी जिसे सुनकर आप की आंखे नम हो जाएगी साथ ही उन पुलिसवालो के जज्बे को सलाम है जो अपना फर्ज निभाने के लिए अपना सब कुछ त्याग देते है।

पूरा देश इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहा है इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र । पूरे देश में तमाम जगहों पर ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जहां कहीं पर कोई मां अस्पताल में ड्यूटी करने की वजह से अपने बच्चे से नहीं मिल पा रही है ताकि वह समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी और कर्तव्य का निर्वहन कर सके ऐसी ही एक तस्वीर आज हम आपको महाराष्ट्र के बीड़ जिले की दिखा रहे हैं जिसमें एक पुलिस अधिकारी अपने 2 साल के मासूम बच्चे से कई दिनों से मिल नहीं पा रहा है और वह कहते हैं की करुणा से इस लड़ाई को जीतने के बाद वह जरूर अपने बच्चे से मिलेंगे हालांकि इस दरमियान वह और उनका छोटा सा बेटा एक दूसरे से खिड़की के पास खड़े होकर बातें करते हैं यह तस्वीरें बहुत कुछ कहते हैं जहां एक पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन करने के लिए दूसरे लोगों को इस महामारी से बचाने के लिए अपने परिवार से दूर है।

डैडी घर क्यों नहीं आते यह वाक्य हर परिवार का बच्चा अपने माता-पिता से उनके न मिलने पर पूछता है लेकिन यहां हम आपको बीड़ जिले के ग्रामीण पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिस निरीक्षक सुजीत बडे की कहानी बता रहे हैं सुजीत कई दिनों से महामारी के चलते अपने परिवार से नहीं मिल पाए हैं ऐसे में उनका 2 साल का छोटा सा मासूम बेटा हमेशा जो अपने पापा की गोद में खेलता था वह कई दिनों से पापा से मिल तक नहीं पाया है इसीलिए वह अक्सर पूछता है डेडा घर क्यों नहीं आते वह वहां क्यों रहते हैं।

खुद को परिवार को और आसपास के लोगों को कॅरोना से बचाने के लिए सुजीत ने परिवार से ना मिलने का फैसला किया है ताकि करुणा के कहर से बचा जा सके सुजीत को ड्यूटी के वक्त उन तमाम इलाकों में भी जाना पड़ता है जहां पर कोरोना संक्रमित भी रहते हैं ऐसे में वह कई दिनों से अपने घर नहीं गए हैं।

तस्वीर में देखिए एक पिता और पुत्र की बेहद ही प्यारी बातचीत जिसमें 2 साल का छोटा सा बच्चा जब भी उसे अपने पिता से बात करनी होती है तो वह बालकनी की तरफ आता है एक छोटा सा स्टूल लेकर और वहीं से डैडी आ जाओ डैडी आ जाओ पुकारने लगता है अगर फोन नहीं आता है तो वह घर में कहता है कि मेरे डैडी घर में नहीं रहते वह वहां रहते हैं। स्टूल पर खड़े होकर पिता और पुत्र बातें करते हैं जब भी सुजीत के पास में वक्त होता है तो वह अपने बेटे से ऐसे ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उसको मिलते हैं और बातें करते हैं।

सुशील कहते हैं कि आज नहीं तो कल कोरोना से यह जंग हम जीत ही जाएंगे तब तक आपको भी अपने घर पर ही रहना है ताकि यह वायरस फैलने से रोका जा सके।

कोरोना से लड़ने के लिए पुलिस और डॉक्टर चौबीस घन्टे काम कर रहे है और लोगो से सरकार अपील कर रही है कि अपने घरों से बाहर नही निकले लेकिन कुछ ऐसे लोग है जो इस नियम का पालन नही करते हुए अपने घर मौत को दावत दे रहे है हम उनसे गुजारिश करते है कि इन सभी लोगो के योगदान को देखे और सिर्फ इतना सहयोग करे कि अपने घर रहे ताकि इस जंग से जीता जा सके।

घर मे रहे सुरक्षित रहे।

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