होम News कोरोना की वजह से 'झायलॉग' कंपनी की आर्थिक मुसीबतों में वृद्धी

कोरोना की वजह से ‘झायलॉग’ कंपनी की आर्थिक मुसीबतों में वृद्धी

कोरोना की वजह से ‘झायलॉग’ कंपनी की आर्थिक मुसीबतों में वृद्धी

कंपनी डायरेक्टर ने अधिकारो का गलत इस्तमाल किया

शेअरहोल्डर्स फोरम ने किया आरोप

मुंबई, ता. 9 : कई बँक से लिया हुआ कर्ज वापीस लौटाने में नाकामायब रहे ‘झायलॉग’ इस ग्लोबल आयटी कंपनी की आर्थिक मुसीबते कोरोना महामारी की वजह से और भी बढती दिखाई दे रही है। इस विषय पर चेन्नई हायकोर्ट में प्रलंबित सूनवाई लॉकडाऊन की वजह से अब तक पुरी नही हो पाई है। इस बात का गैरफायदा उठाकर कंपनी के डायरेक्टर्स अपने स्वार्थ के लिए कंपनी का बिजनेस और साधनसामग्री लूट कर, 40 हजार शेअरहोल्डर्स के भविष्य के साथ खिलवाड कर रहे है, ऐसा इलजाम शेअरहोल्डर्स की ओर से दाखिल किए गए प्रतिज्ञापत्र में किया है। इनमें मुंबई स्थित शेअरहोल्डर्स की तादात भी बहुत ज्यादा है और इस विषय में न्याय मिले, ऐसी लिखित मांग शेअरहोल्डर्स फोरम की ओर से पंतप्रधान और केंद्रीय अर्थमंत्री कार्यालय से की गई है।

शेअरहोल्डर्स के मुताबिक, कई बँको से और फायनान्शिअल इन्स्टिट्यूट से लिया लोन वापीस ना करने की वजह से 2014 में झायलॉग कंपनी के विषय में प्रॉव्हिजनल लिक्विडेशन का निर्णय लिया गया था। सन 2016 में चेन्नई हायकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टीस को बतौर ऍडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंट किया। इसके बाद ऍडमिनिस्ट्रेटर की ओर से कुछ डायरेक्टर्स की नियुक्ती की गई। इनमे से दो ऍडिशनल डायरेक्टर्स के खिलाफ सेबी (SEBI) कि ओर से कुछ निर्बंध लगाये गये। सिर्फ खुदके फायदे के लिए इन ऍडिशनल डायरेक्टर्स ने आपसी मेलजोलसे झायलॉग कंपनी के 200 कर्मचारी, उनके कम्प्युटर और अन्य सामग्री दुसरी कंपनी में गैरकानुनी तरिके से भेजी, ऐसा स्पष्टीकरण शेअरहोल्डर्स द्वारा हायकोर्ट में दिया गया है।

हायकोर्ट, ऍडमिनिस्ट्रेटर और शेअरहोल्डर्स की जानकारी के बावजुद, सिर्फ खुद के फायदे के लिए झायलॉग का बिजनेस और बाकी सामग्री दुसरी सबसिडरी कंपनी में जमा करने का षडयंत्र सब के सामने ना आने पाये इसी लिए 2018 से अब तक कंपनी ने एक भी अन्युअल रिपोर्ट लोगो के सामने रखा नही, ऐसा इलजाम शेअरहोल्डर्स की ओर से लगाया जा रहा है।

एक तरफ कंपनी की सामग्री सबसिडरी कंपनी को दी जा रही है, वही दुसरी ओर अब तक एक भी बँक का लोन वापीस लौटाया गया नही, ऐसी जानकारी शेअरहोल्डर्स की ओर से दी गई। जीन डायरेक्टर्स पर सवाल उठाये जा रहे है, उन्हे पहले से ही युनियन बँक, सिंडिकेट बँक, देना बँक, फेडरल बँक इनकी ओर से विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया गया है।

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