होम Strategy Politics गुजरात चुनाव को लेकर बीजेपी पर साधा शिवसेना ने सामना के जरिए...

गुजरात चुनाव को लेकर बीजेपी पर साधा शिवसेना ने सामना के जरिए निशाना

शिवसेना ने अपने मुख्यपत्र सामान के जरिये बीजेपी पर निशाना साधा और इस बात पर जोर दिया कि गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीख तय हुई और उसी दौर्क़न दिल्ली महानगर पालिका चुनाव का बिगुल बज गया यानी कि बीजेपी केजरीवाल को दिल्ली में ही उलझा कर रखना चाहती है किस तरह से सामना में गुजरता चुनाव को लेकर जिक्र किया गया है आइये हम आप को बताते है।

गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली महानगरपालिका चुनाव का भी बिगुल बज गया है। गुजरात विधानसभा की १८२ सीटों के लिए १ दिसंबर और ५ दिसंबर को दो चरणों में चुनाव होगा, तो वहीं दिल्ली महानगरपालिका का चुनाव ४ दिसंबर को होगा। गुजरात में वोटों की गिनती हिमाचल प्रदेश के साथ ८ दिसंबर को होगी। वहीं दिल्ली महानगरपालिका की एक दिन पहले यानी ७ दिसंबर को वोटों की गिनती होगी और उसी दिन चुनावी परिणाम घोषित किए जाएंगे। गुजरात में २७ वर्षों से एकछत्र सत्ता चला रही भाजपा को पिछली बार कांग्रेस ने पसीने छुड़ा दिए थे। इस बार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भाजपा की नाक में दम कर दिया है। केजरीवाल को गुजरात में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है इसलिए पहले से पसीने से तरबतर भाजपा की चिंता और बढ़ गई है। शायद इसीलिए केजरीवाल और ‘आप’ के पैर में दिल्ली महानगरपालिका चुनाव की ‘कड़ी’ डालकर उन्हें उलझाने का खेल खेला गया है। गुजरात और दिल्ली दोनों जगहों पर केजरीवाल को अब ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा। उसमें दिल्ली विधानसभा की सीढ़ी मानी जानेवाली दिल्ली महानगरपालिका का महत्व होने से केजरीवाल को एक पैर दिल्ली में मजबूती के साथ रखना होगा। उसका फायदा भाजपा को गुजरात में हो सकता है। ऐसा गणित दिल्ली महानगरपालिका के चुनाव के दरमियान हो सकता है। सही अर्थों में गुजरात विधानसभा चुनाव का रणसंग्राम प्रत्यक्ष रूप से पिछले दो महीने से जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह दोनों अदल-बदलकर हर सप्ताह किसी-न-किसी कार्यक्रम के उपलक्ष्य में गुजरात के दौरे कर रहे थे। आचार संहिता लागू होने से पहले विकास परियोजनाओं के उद्घाटन, भूमि-पूजन आदि कार्यक्रमों की गुजरात में बड़े पैमाने पर लहर आई हुई थी। हालांकि मोरबी पुल दुर्घटना की वजह से तथाकथित गुजरात मॉडल का असली चेहरा दुनिया के सामने आ गया। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लगातार दौरे का आयोजन कर भाजपा द्वारा पकाई गई खिचड़ी एक पल में जल गई। गत दिनों पश्चिम बंगाल में हुई पुल दुर्घटना को लेकर भाजपा और मोदी ने वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार के खिलाफ कहर बरपा दिया था लेकिन नियति का न्याय देखिए जिस तरह गड्ढा भाजपा ने विपक्ष के लिए खोदा था, उसी गड्ढे में भाजपा आज खुद गिर गई। २५ दिन के चुनावी प्रचार की हर प्रचार सभा में भाजपा से मोरबी के मृत्यु तांडव के बारे में सवाल पूछा जाएगा। वैसे तो गुजरात राज्य छोटा है, फिर भी भाजपा के लिए वह सबसे बड़ी प्रयोगशाला है। लिहाजा, गुजरात के चुनाव का अन्य किसी भी राज्य की तुलना में असाधारण महत्व है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री और गृहमंत्री का यह राज्य है। हालांकि पिछले २७ वर्षों से गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की एकछत्र सत्ता है। इसलिए गुजरात के चुनाव को वर्ष २०२४ के लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल या रिहर्सल के तौर पर नहीं देखा जा सकता। क्योंकि गुजरात में विपक्ष के पास गंवाने जैसा कुछ भी नहीं बचा है और भाजपा विरोधी वोटों के बिखराव के कारण कमाने जैसा भी शेष नहीं है। इसे भी सवाल ही कहना होगा। दरअसल, वर्ष २०१७ के चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। कुल १८२ में से ९९ सीटें भाजपा जीती तो ७७ सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी हुए। आंकड़ों पर गौर करें तो २२ सीटों का मामूली अंतर था। इसका मतलब इतना ही है कि उन दिनों कांग्रेस को गुजरात में बहुत बड़ा अवसर मिला था। बहरहाल, बेहद बढ़ी महंगाई, गुजरात के समुद्री तटों पर पकड़े गए अरबों रुपए के ड्रग्स, शराबबंदी होते हुए भी गुजरात में जहरीली शराब से चढ़ी बलि, मोरबी की ताजा पुल दुर्घटना और २७ वर्षों से वहां सत्ता की एंटी इनकम्बेंसी ये सभी मुद्दे भाजपा के खिलाफ हैं। लेकिन अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने गोवा की तरह गुजरात विधानसभा का चुनाव भी लड़ने का निर्णय लिया है। इसलिए द्विपक्षीय हुआ चुनाव अब त्रिकोणीय होनेवाला है। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव होता है और उसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को ही मिलता है। ये गोवा सहित कई राज्यों और लोकसभा चुनाव में बार-बार साबित हो चुका है। फिर भी गुजरात में त्रिकोणीय मुकाबले के ही पत्ते पीसे गए। मोदी-शाह के राज्य के तौर पर गुजरात विधानसभा के चुनाव की ओर स्वाभाविक है सारे देश का ध्यान केंद्रित है। कहानी में राजा के प्राण जिस तरह पिंजरे के तोते में होता है, उसी तरह प्रधानमंत्री की जान गुजरात में फंसी है। गुजरात यानी मोदी-शाह की होम पिच। लेकिन यह राज्य हाथ से निकल गया तो दिल्ली का सिंहासन भी डगमगाने लगेगा। इसीलिए गुजरात के ‘तोते’ को जिलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी मशक्कत कर रही है। गुजरात के गदर में दिल्ली महानगरपालिका चुनाव की भी धूल इसीलिए उड़ाई गई है। महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों के उद्योग, परियोजना, विकास की योजनाएं सब कुछ गुजरात में भगाकर ले जाने के पीछे एक ही रहस्य है। तोता जिंदा रहना चाहिए। यह तोता भाजपा की ही नजर कैद में रहेगा या गुजरात की जनता पिंजरे का दरवाजा खोलकर तोते की रिहाई करेगी, ये ८ दिसंबर को ही स्पष्ट होगा!

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Must Read

मुंबई में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस, सीएम ने दिव्यांग मंत्रालय बनाने की घोषणा की

मुंबई में मनाया गया अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस, सीएम ने दिव्यांग मंत्रालय बनाने की घोषणा की

अमेरिका में जॉब और वीजा का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपए ठगते थे

मुंबई साइबर पुलिस ने 4 विदेशी नागरिकों को महाराष्ट्र के पुणे से किया गिरफ्तार अमेरिका में जॉब और वीजा...

उद्धव गुट के नेता कृष्णा हेगड़े शिंदे गुट में हुए शामिल

उद्धव गुट के नेता कृष्णा हेगड़े शामिल हुए शिंदे गुट में .. उद्धव सेना को लगा एक और झटका...

लिव-इन-रिलेशनशिप को लेकर हाऊसिंग सोसायट नियम बनाए , राज्यपाल से की विनती – आत्मसम्मान मंच

श्रद्धा वालकर की दुखद घटना को लेकर "आत्मसम्मान मंच" की ओर से महाराष्ट्र के माननीय राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी को मिलकर...

राहुल गांधी आज करेंगें गुजरात मे चुनावी प्रचार

राहुल गांधी आज करेंगे गुजरात मे प्रचार कांग्रेस नेता राहुल गांधी आज से गुजरता में होने वाले विधानसभा चुनाव...